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डेडबॉडी के साथ रेप करके विकास पैदा कर्रेंगे ब्राह्माणवादी योगी - 100 करोर मुलनिवासी हैरान

गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ उर्फ अजय सिंह यूपी के नए सीएम होंगे. 
जितने विवाद योगी से जुड़े रहे हैं, 
उतने ही आपराधिक मामले भी उनके खिलाफ दर्ज हैं. 
जिनमें हत्या के प्रयास जैसे संगीन मामले भी शामिल हैं. 
उनके खिलाफ गोरखपुर और महाराजगंज में लगभग एक दर्जन मामले दर्ज हैं. 
जिनका जिक्र उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान अपने हलफनामे में किया था.
योगी के खिलाफ धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और सद्भाव बिगाड़ने के मामले में आईपीसी की धारा 153 ए के तहत दो मामले दर्ज हैं.
इसके अलावा उनके खिलाफ वर्ग और धर्म विशेष के धार्मिक स्थान को अपमानित करने के आरोप में आईपीसी की धारा 295 के दो मामले दर्ज हैं.





उनके खिलाफ कृषि योग्य भूमि को विस्फोटक पदार्थ का इस्तेमाल करके नुकसान पहुंचाने के इरादे से कार्य करने आदि का एक मामला भी दर्ज है.



यही नहीं उनके खिलाफ आपराधिक धमकी का एक मामला आईपीसी की धारा 506 के तहत दर्ज है.
उनके विरुद्ध आईपीसी की धारा 307 के तहत हत्या के प्रयास का एक संगीन मामला भी चल रहा है.
और इसको सभा में मुस्लिम महिलाओं को कब्र से निकल कर बलात्कार करने की घोषणा हो रही है पर ये ख़ामोशी से समर्थन कर रहा है।#लानत_है



मंच पर मौजूद योगी आदित्यनाथ और उनके समर्थक अपनी भाषण में मुस्लिममहिलाओं को कब्र से निकालकर खुलेआम बलात्कार की बात कर रहे, और अब वही हैं उन महिलाओं के मुख्यमंत्री.

कब्र से मुस्लिम महिलाओं की लाश को निकालकर रेप करने का आह्वान मोदी के सांसद "योगी आदित्यनाथ" ने अपनी एक रेली में किया था !! और अभी कुछ दिनों पहले लाश के साथ रेप का एक मामला भी सामने आया है !! क्या हिंदू धर्म लाश के साथ रेप की शिक्षा देता है .. ये सवाल मेरा उन सभी हिंदुओं से है जो योगी आदित्यनाथ और आरएसएस को अपना रहनुमा मानते हैं !!

दंगाई ब्राह्माणवादी योगी आदित्यनाथ बने मुख्यमंत्री - शुद्र OBC केशव मौर्या के औकात पता चला

इसी को कहते है जातिवाद बढ़ाना
भाजपा का जातिवाद आज फिर साबित हुआ...
जातिय समीकरण साधकर मुख्यमंत्री ठाकुर योगी आदित्यनाथ ,उपमुख्यमंत्री ब्राह्मणदिनेश शर्मा और उपमुख्यमंत्री पिछड़े वर्ग से केशव प्रसाद मौर्या 


आखिर वही हुआ। संघ की पैदा हुई पार्टी में केशव मौर्या को बीमार होना पड़ गया। क्या समझे थे की सरदार बहुत खुश होगा और मुराव, कोहांर, बढ़ई के हाथ सत्ता रुपी बन्दूक थमा देगा। अरे मौर्या जी हेडगेवार ने 1926 में ही निनावे जैसे दलित को ब्राह्मण के बर्तन में अपने साथ बिठा कर खाने से मना कर दिया था। मौर्या जी भूल गए की आप् उसी निनावे के बंशज हो।
नज़ीर मलिक जी की वाल से
केशव प्रसाद मौर्या ने केंद्रीय मंत्री पंडित कलराज मिश्रा का हाथ पकड़ा तो कलराज ने न केवल हाथ झटक दिया, वरन डाँट भी पिला दी- ओबीसी होकर ब्राह्मण को छूते हो?
पंडितजी को अपवित्र कर दिया! सर्दी के दिनों में पंडित जी को तुरंत नहाना पड़ गया होगा!
"75" साल पार कर चुके पंडित जी को ठंड लग जाए तो कौन जिम्मेदार होगा?
 बड़े आए मुख्यमंत्री बनने का सपना देखने वाले, दूर हटो! देखा नहीं, एक हाथ अमित शाह जी पकड़े हैं!!


1. मुख्यमंत्री .......अजय सिंह विष्ट उर्फ योगी आदित्य
नाथ ......ठाकुर.....क्षत्रिय
2. उप मुख्यमंत्री.....दिनेश शर्मा.....बामन......ब्राह्मण
3. उप मुख्यमंत्री....केशव मौर्या.....कोइरी.....शुद्र
4. उप मुख्यमंत्री.....?????........?????....वैश्य...
(खोज जारी)
बड़ी बिडंमना है ....…........
केशव .............3सरे नंबर पे.......
जय साम्राज्यवाद.......
समाजवाद रसातल में।

ब्राह्मण बोह्त खुस हुआ


Waman Meshram

टीपू सुल्तान: 700 ब्राह्माणवादी के खिलाफ लड़कर मुलनिवासी महिलाओं को स्थन ढकने का अधिकार

सोशियल मीडीया पे ब्राह्माणवादी यानी मनुवादी लोग मातम मानता है के टीपू ने 700 ब्राह्मण को मार दिया था.
टीपू सुलतान ने दि थी अछूत महिलाओं को स्थन ढकने की अनुमति, वही खीज आज निकाली जा रही है ।
इतिहास के झरोखे से :-टीपू सुल्तान और स्त्री स्वतंत्रता
कोई भी राजा हो क्या वह अन्याय इसलिए ना देखे और दंड ना दे कि यह अन्यायी उसके धर्म का नहीं और इस कारण से भविष्य में उस पर अन्य धर्मों के उपर किये अत्याचार के लिए गालियाँ दी जाएंगी ?

संघी और वाम इतिहासकारों ने टीपू सुल्तान को लेकर थोड़ा बड़ा दिल दिखाया पर अब टीपू सुल्तान को भी विवादित करने का प्रयास किया गया और औरंगजेब के जैसा बनाने का प्रयास किया गया , इतिहासकार टीपू सुल्तान के प्रति इस लिए झूठ ना लिख सके क्युँकि टीपू सुल्तान का सारा इतिहास बहुत करीब के दिनों का है और यह तथ्य और सबूत है कि वह अंग्रेज़ों से लड़ते हुए शहीद हुए और अपनी पूरी सल्तनत बर्बाद कर दी।
दरअसल उनको बदनाम भी केवल सवर्ण कर रहे हैं , हकीक़त यह है कि यदि इस देश के इतिहास को यदि निष्पक्ष रूप से लिख दिया जाए तो आज अचानक पैदा हो गये बड़े बड़े महापुरुष नंगे हो जाएँ और जिन्हें खलनायक बनाया जा रहा है वह देश के महापुरुष हो जाएँ ।
राजाओं की साम्राज्यवाद के कारणों से हुई लड़ाईयों को हिन्दू मुस्लिम की लड़ाई की तरह से अब प्रस्तुत किया जा रहा है और लडाई में मरने वाले सैनिकों को गिन गिन कर बताया जा रहा है कि इतने वध उस मुस्लिम शासक ने किये जैसे हिन्दू राजाओं ने युद्ध में विरोधी सेनाओं का धर्म देखकर ही मारा हो कि केवल मुस्लिम सैनिक मारें जाएँ हिन्दू सैनिकों को कोई नुकसान ना हो चाहे विरोधी सेना का ही क्युँ ना हो ।
तब तो ऐसा कुछ नहीं हुआ पर अब ऐसा ही किया जा रहा है ।
ब्रिटेन की नेशनल आर्मी म्यूजियम ने अंग्रेजी हुकूमत से लोहा लेने वाले 20 सबसे बड़े दुश्मनों की लिस्ट बनाई है जिसमें केवल दो भारतीय योद्धाओं को ही इसमें जगह दी गई है
नेशनल आर्मी म्यूजियम के आलेख के अनुसार टीपू सुल्तान अपनी फौज को यूरोपियन तकनीक के साथ ट्रेनिंग देने में विश्वास रखते थे। टीपू विज्ञान और गणित में गहरी रुचि रखते थे और उनके मिसाइल अंग्रेजों के मिसाइल से ज्यादा उन्नत थे, जिनकी मारक क्षमता दो किलोमीटर तक थी।
जो अंग्रेज टीपू से इतना घबराते थे उनके बनाए झूठे इतिहास को दिखाकर संघ के लोग टिपू का विरोध कर रहे हैं ।सच यह है कि विरोध कर रहे ऐसे लोग ही भारत के निष्पक्ष इतिहास के लिखने पर नंगे हो जाएँगे क्युँकि यही हर दौर में अत्याचारी रहे हैं और इसी अत्याचार को करने के लिये इन लोगों ने टीपू से अंग्रेजों की लड़ाई में अंग्रेज़ो का साथ दिया ।
त्रावणकोर के सवर्ण महाराजा , मराठे और हैदराबाद के निजाम अंग्रेजों के सबसे बड़े मित्र थे जो चारों ने मिलकर एक अकेले टीपू सुल्तान के विरूद्ध युद्व किया जिससे इनकी ऐय्याशियाँ चलती रहें देश जाए भाड़ में , चाहे इसपर अंग्रेजों का राज हो या राक्षसों का ।
दरअसल जो ब्राम्हणों की हत्याएं करने का आरोप टीपू सुल्तान पर है वह त्रावणकोर राज्य में है जहाँ का ब्राम्हण राजा एक ऐय्याश और निरंकुश राजा था और उसके जुल्मों से वहाँ की जनता से छुटकारा दिलाने के लिए टीपू ने उसपर आक्रमण किया और युद्ध में त्रावणकोर की सेना में शामिल ब्राम्हण मारे गये। और अंततः राजा को वहाँ की दलित महिलाओं को न्याय देना पड़ा ।
केरल के त्रावणकोर इलाके, खास तौर पर वहां की महिलाओं के लिए 26 जुलाई का दिन बहुत महत्वपूर्ण है। इसी दिन 1859 में वहां के महाराजा ने दलित औरतों को शरीर के ऊपरी भाग पर कपड़े पहनने की इजाजत दी।
इस परंपरा की चर्चा में खास तौर पर निचली जाति नादर की स्त्रियों का जिक्र होता है क्योंकि अपने वस्त्र पहनने के हक के लिए उन्होंने ही सबसे पहले विरोध जताया और जिनको हक दिलाने के लिए टीपू सुल्तान ने उस राज्य पर आक्रमण किया।
दरअसल उस समय न सिर्फ पिछड़ी और दलित बल्कि नंबूदिरी ब्राहमण और क्षत्रिय नायर जैसी जातियों की औरतों पर भी शरीर का ऊपरी हिस्सा ढकने से रोकने के कई नियम थे।
नंबूदिरी औरतों को घर के भीतर ऊपरी शरीर को खुला रखना पड़ता था। वे घर से बाहर निकलते समय ही अपना सीना ढक सकती थीं। लेकिन मंदिर में उन्हें ऊपरी वस्त्र खोलकर ही जाना होता था। नायर औरतों को ब्राह्मण पुरुषों के सामने अपना वक्ष खुला रखना होता था।
सबसे बुरी स्थिति दलित औरतों की थी जिन्हें कहीं भी अंगवस्त्र पहनने की मनाही थी। पहनने पर उन्हें सजा भी हो जाती थी। एक घटना बताई जाती है जिसमें एक दलित जाति की महिला अपना सीना ढक कर महल में आई तो रानी अत्तिंगल ने उसके स्तन कटवा देने का आदेश दे डाला।
इस अपमानजनक रिवाज के खिलाफ 19 वीं सदी के शुरू में आवाजें उठनी शुरू हुईं। 18 वीं सदी के अंत और 19 वीं सदी के शुरू में केरल से कई मजदूर, खासकर नादन जाति के लोग, चाय बागानों में काम करने के लिए श्रीलंका चले गए। बेहतर आर्थिक स्थिति, धर्म बदल कर ईसाई बन जाने औऱ यूरोपीय असर की वजह से इनमें जागरूकता ज्यादा थी और ये औरतें अपने शरीर को पूरा ढकने लगी थीं।
धर्म-परिवर्तन करके ईसाई बन जाने वाली नादर महिलाओं ने भी इस प्रगतिशील कदम को अपनाया। इस तरह महिलाएं अक्सर इस सामाजिक प्रतिबंध को अनदेखा कर सम्मानजनक जीवन पाने की कशिश करती रहीं।यह कुलीन मर्दों को बर्दाश्त नहीं हुआ। ऐसी महिलाओं पर हिंसक हमले होने लगे। जो भी इस नियम की अहेलना करती उसे सरे बाजार अपने ऊपरी वस्त्र उतारने को मजबूर किया जाता।
दलित औरतों को छूना न पड़े इसके लिए सवर्ण पुरुष लंबे डंडे के सिरे पर छुरी बांध लेते और किसी महिला को ब्लाउज या कंचुकी पहना देखते तो उसे दूर से ही छुरी से फाड़ देते। यहां तक कि वे औरतों को इस हाल में रस्सी से बांध कर सरे आम पेड़ पर लटका देते ताकि दूसरी औरतें ऐसा करते डरें।
1814 में त्रावणकोर के अंग्रेजों के चमचे दीवान कर्नल मुनरो ने आदेश निकलवाया कि ईसाई नादन और नादर महिलाएं ब्लाउज पहन सकती हैं।
लेकिन इसका कोई फायदा न हुआ। उच्च सवर्ण के पुरुष इस आदेश के बावजूद लगातार महिलाओं को अपनी ताकत और असर के सहारे इस शर्मनाक अवस्था की ओर धकेलते रहे।आठ साल बाद फिर ऐसा ही आदेश निकाला गया। एक तरफ शर्मनाक स्थिति से उबरने की चेतना का जागना और दूसरी तरफ समर्थन में अंग्रेजी सरकार का आदेश। और ज्यादा महिलाओं ने शालीन कपड़े पहनने शुरू कर दिए। इधर उच्च वर्ग के पुरुषों का प्रतिरोध भी उतना ही तीखा हो गया। एक घटना बताई जाती है कि नादर ईसाई महिलाओं का एक दल निचली अदालत में ऐसे ही एक मामले में गवाही देने पहुंचा। उन्हें दीवान मुनरो की आंखों के सामने अदालत के दरवाजे पर अपने अंग वस्त्र उतार कर रख देने पड़े। तभी वे भीतर जा पाईं। संघर्ष लगातार बढ़ रहा था और उसका हिंसक प्रतिरोध भी।सवर्णों के अलावा राजा खुद भी परंपरा निभाने के पक्ष में था।
क्यों न होता ? आदेश था कि महल से मंदिर तक राजा की सवारी निकले तो रास्ते पर दोनों ओर नीची दलित जातियों की अर्धनग्न कुंवारी महिलाएं फूल बरसाती हुई खड़ी रहें। उस रास्ते के घरों के छज्जों पर भी राजा के स्वागत में औरतों को ख़ड़ा रखा जाता था। राजा और उसके काफिले के सभी पुरुष इन दृष्यों का भरपूर आनंद लेते थे।
आखिर 1829 में इस मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया।सवर्ण पुरुषों की लगातार नाराजगी के कारण राजा ने आदेश निकलवा दिया कि किसी भी दलित जाति की औरत अपने शरीर का ऊपरी हिस्सा ढक नहीं सकती। अब तक ईसाई औरतों को जो थोड़ा समर्थन दीवान के आदेशों से मिल रहा था, वह भी खत्म हो गया। अब हिंदू-ईसाई सभी वंचित महिलाएं एक हो गईं और उनके विरोध की ताकत बढ़ गई। सभी जगह महिलाएं पूरे कपड़ों में बाहर निकलने लगीं। इस पूरे आंदोलन का सीधा संबंध भारत की आजादी की लड़ाई के इतिहास से भी है।
टीपू सुल्तान ने इसी अन्याय को समाप्त करने के लिए त्रावणकोर पर आक्रमण किया जिससे त्रावणकोर की सेना के तमाम लोग मारे गये जिसे आज ब्राम्हणों के वध के रूप में बताकर उनका विरोध किया जा रहा है उसी युद्व में विरोधियों ने ऊंची जातियों के लोगों दुकानों और सामान को लूटना शुरू कर दिया। राज्य में शांति पूरी तरह भंग हो गई।
दूसरी तरफ नारायण गुरु और अन्य सामाजिक, धार्मिक गुरुओं ने भी इस सामाजिक रूढ़ि का विरोध किया और अंततः 26 जुलाई 1859 को वहाँ के राजा ने दलित औरतों को स्तन ढकने की अनुमति प्रदान की ।टीपू सुल्तान से वही खीज आज निकाली जा रही है ।
ज़रा सोचिएगा कि त्रावणकोर का राजा कोई मुस्लिम होता और दलितों के साथ ऐसा व्यवहार होता तो आज क्या स्थिति होती और यदि टीपू कोई दीपू होते तो

ब्राह्माणवादी ने मारा बाबा साहेब आंबेडकर के मूर्ति को जूता - 85% मुलनिवासी के भावना आहत

देश के संविधान लिखने वाला बाबा साहेब आम्बेडकर के मूर्ति का घोर अपमान किया गया..ब्राह्माणवादी ने इस वीडियो को सोशियल मीडीया पे भी डाला..3% ब्राह्मण आज 85% मुलनिवासी के मसीहा के अपमान कर रहा है..न्बा पोलीस ना प्रशसन कोई रोकने वाला . इसे



जापान ,जर्मनी, नीदरलैंड ,इंग्लैंड ,फ़्रांस जैसे developed देश बैलेट पेपर पर चुनाव कराते और भारत जहा 80 करोड़ गरीब भूखे नंगे लोग रहते है वो देश EVM मशीन से चुनाव क्यों कराता है ,
जानते हो क्यों ?
1993 में बैलेट पेपर से हुए चुनाव से जब सपा बसपा ने यूपी से ब्राह्मणों की दो बडी पार्टी "कांग्रेस बीजेपी" दोनों को ख़त्म कर दिया था तब ब्राह्मण घबरा गए की अगर लोग सपा बसपा से जुड़ गए और इसी तरह बैलेट पेपर से चुनाव होते रहे तो कांग्रेस बीजेपी पूरे देश से ख़त्म हो जायेगी ,इसलिए ब्राह्मणों ने EVM मशीन से चुनाव कराने का षड्यंत्र रचा और उसी समय जिस EVM मशीन को यूरोप में गड़बड़ी के चलते बंद किया जा रहा था उसी मशीन को ब्राह्मण 1999 में भारत ले आये ताकि EVM मशीन में गड़बड़ी कर धीरे धीरे सपा बसपा को यूपी से भी ख़त्म किया जा सके और दुबारा ब्राह्मणों की पार्टियों मतलब कांग्रेस बीजेपी का राज लाया जा सके । ब्राह्मणों ने मकसद 2017 में पूरा किया ,जानबूझकर धीरे धीरे किया ताकि किसी को शक न हो ।

EVM सपोर्ट: अन्ना हज़ारे ने दिखाया आपना ब्राह्माणवादी चड्डी

अन्ना हज़ारे ने दिखाया आपना ब्राह्माणवादी चड्डी. देश मे मुलनिवासी आंदोलन रोकने के लिए संघ ने अन्ना हज़ारे को नया गाँधी बनाके मार्केट मे लाया था. डेमॉनेटिज़ेशन के चलते 150 भारतिया नागरिक मरने के बाद भी चुप रहने वाला ब्राह्माणवादी अन्ना ने EVM के सपोर्ट किया और वाजपा के सरकार को सही ठहराया.. देश भर मे EVM के खिलाफ OBC Sc ST Dalit Muslim Sikh ने आंदोलन कर रहा है..ये बात सबको पता चल गया के EVM मशीन को हॅक किया गया फिर भी मनुवादी मीडीया ने लगातार इस आंदोलन को दबाने क कौसीस मे लगे है..



20% मुस्लिम ने शुरू किया 3% ब्राह्माणवादी (वीदेसी) के खिलाफ मोर्चा

3 % ब्राह्मण वादी जो लोग हमेशा मुस्लिम के खिलाफ सोशियल मीडीया पे अफवाह ओर नफ़रत फेला के अनुसूचित दलित आदिवासी पीचारा जातियो को आपस मे लड़ने के साज़ीस को इन मुस्लिम नौजवान ने करारा जवाब दिया..अभी कुछ दिन पहले ब्राह्माणवादी संघ ने EVM घोटाला करके उत्तर प्रदेश मे मनुवादी शशाण कायम किया ओर दंगा करने के चक्कर मे बोहट से अफवाह ब्राह्मण वादी लोग फ़ेसबुक पे कर रहा है.



ब्राह्मण गुंडा ने दलित विधयक के सर फोडा - घोटाला करके चुनाव जितने के बाद

रामराज्य की शुरुवात ।। बहुत हुआ गुंडाराज क्यों कि अबकी बीजेपी की सरकार ।।




सत्ता के नशे में चूर भाजपा नेता ....
दलित युवक को पीटकर किया लहूलुहान ....!!
इलाहाबाद : इसे सत्ता की हनक ही कह सकते हैं कि भाजपा नेता सहर उत्तरी इलाहबाद से नवनिर्वाचित विधायक हर्ष वर्धन वाजपेयी के पिता एवं कौशाम्बी सांसद विनोद सोनकर की सह पर भाजपा नेताओं ने गुंडागर्दी की हद ही पार कर दी, गुंडागर्दी की हद तब पार हो गयी जब भाजपा नेताओं ने खुलेआम एसओ कैंट को धमकी दी, कैंट थानांतर्गत राजपुर निवाशी प्रमोद पासी उसके भाई एवं उसकी माँ को मार पीटकर किया लहूलुहान किया..!!

EVM घोटाला दबाने के लिए ब्राह्मण बादी मीडीया ने दिया था मुस्लिम सिंगर नाहिद अफ्रीन पर फतवा


ब्राह्मण बादी मीडीया ने नाहिद अफ्रीन पेर फतवा जारी किया घोटाला
से मुलनिवासी के धयन हटाने के

लिए

उत्तर प्रदेश EVM घोटाला: 3% ब्राह्मणवादी ने दि 20% मुसलमान को घर से भागने के धमकी

बरेली | उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावो में बीजेपी को बम्पर जीत मिली है. प्रदेश में बीजेपी ने तीन चौथाई बहुमत हासिल कर इतिहास रच दिया. हालाँकि बीजेपी संसदीय समिति ने अभी मुख्यमंत्री का नाम तय नही किया है. यही कारण है की प्रदेश में अभी भी सरकार का गठन नही हो पाया है. लेकिन बीजेपी समर्थक अभी से ऐसा बर्ताव कर रहे है जैसे बीजेपी की सरकार बन चुकी है. इसलिए वो मुस्लिम समुदाय के लोगो को डराने का प्रयास कर रहे है.

एक ऐसी ही घटना बरेली के एक गाँव से सामने आई है. यहाँ कुछ लोगो ने ऐसे पोस्टर चिपकाये है जिनमे लिखा है की मुस्लिम साल के अंत तक गाँव छोड़कर चले जाए. मामला सामने आते ही प्रशासन में हडकंप मच गया. उन्होंने गाँव पहुंचकर वहां लगे पोस्टर को हटा दिया. लेकिन अभी भी कुछ पोस्टर गाँव में लगे हुए है. उधर गाँव वालो का कहना है की ये किन्ही बाहरी लोगो को काम है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की खबर के अनुसार बरेली से करीब 70 किलोमीटर दूर स्थित जियांगला गाँव में कुछ लोगो ने मुस्लिमो के लिए धमकी भरे पोस्टर लगाए है. करीब 2 दर्जन जगहो पर ये पोस्टर लगे हुए है. इनमे मुस्लिमो को धमकी देते हुए लिखा गया की अब उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार आ गयी है, अब गाँव के हिन्दू वही करेंगे जो की अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने देश के मुसलमानों के लिए किया है.
इन पोस्टर में मुस्लिमो को धमकी देते हुए लिखा गया की अगर साल के अंत तक तुम गाँव छोड़कर नही गए तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. गाँव के प्रधान रेवा राम ने बताया की सोमवार की सुबह हमें ये पोस्टर दिखाई दिए. विरोध होने पर पुलिस को सूचना दी गयी जिनके बाद पुलिस प्रशासन ने आकर इन पोस्टर को हटाया. पुलिस ने अज्ञात लोगो के खिलाफ मामला दर्ज कर पांच लोगो को हिरासत में लिया है.